शिक्षण कौशल – शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त एवं कौशल – Class Test 2
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शिक्षण कौशल – शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त एवं कौशल – Class Test 2 — प्रश्न व उत्तर (नमूना)
UP Super TET • शिक्षण कौशल • क्लास नोट्स (टीचर PDF) के सभी प्रश्न + थ्योरी से बने प्रश्न • 25 प्रश्न, हर प्रश्न की विस्तृत व्याख्या सहित।
गतिविधि आधारित (क्रियापरक) शिक्षण का मूल सिद्धांत क्या है?
- केवल सुनकर सीखना
- स्वयं करके सीखना
- केवल पढ़कर सीखना
- केवल रटकर सीखना
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उत्तर: (B) स्वयं करके सीखना
क्रियापरक विधि में छात्र अपनी शारीरिक और मानसिक क्रियाओं द्वारा ज्ञान प्राप्त करता है; यह विधि बाल-केन्द्रित है और सीखते समय बच्चा थकान महसूस नहीं करता।
'वर्ग पहेली हल करना, भाषण देना और चिन्तन-मनन' किस प्रकार की गतिविधि के उदाहरण हैं?
- केवल खेल गतिविधि
- मानसिक गतिविधि
- शारीरिक गतिविधि
- केवल सामूहिक नृत्य
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उत्तर: (B) मानसिक गतिविधि
गतिविधियों का श्रेणीकरण:
शारीरिक — कदमताल, पी.टी., उछल-कूद;
मानसिक — चिन्तन, तर्क, वार्तालाप, वर्ग पहेली, लेखन, भाषण;
दोनों — पशु-पक्षी का नाम लेते हुए आगे-पीछे कूदना, अक्षर कूद।सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching) का सबसे सही अर्थ क्या है?
- शिक्षण का लघु रूप — एक समय में एक कौशल का अभ्यास
- बिना पाठ योजना के पढ़ाना
- केवल सूक्ष्मदर्शी से विज्ञान पढ़ाना
- बहुत बड़ी कक्षा में पढ़ाना
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उत्तर: (A) शिक्षण का लघु रूप — एक समय में एक कौशल का अभ्यास
सूक्ष्म शिक्षण में कक्षा छोटी (5-10 छात्र), समय कम (5-10 मिनट), पाठ्यवस्तु सीमित और एक ही शिक्षण कौशल पर बल होता है। यह अध्यापक बनने से पहले शिक्षण दक्षता का अभ्यास है।
सूक्ष्म शिक्षण का विकास सबसे पहले कहाँ हुआ?
- ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, ब्रिटेन
- हार्वर्ड विश्वविद्यालय
- दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत
- स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका (डी. डब्ल्यू. एलन)
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उत्तर: (D) स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका (डी. डब्ल्यू. एलन)
1963 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में डी. डब्ल्यू. एलन और उनके साथियों ने सूक्ष्म शिक्षण विकसित किया। एलन के अनुसार यह "शिक्षण की सभी क्रियाओं को छोटे-छोटे भागों में बाँटना है।"
सूक्ष्म शिक्षण चक्र का सही क्रम कौन सा है?
- शिक्षण → योजना → पुनर्शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनर्योजना → पुनर्प्रतिपुष्टि
- योजना → पुनर्योजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनर्शिक्षण → पुनर्प्रतिपुष्टि
- प्रतिपुष्टि → योजना → शिक्षण → पुनर्शिक्षण → पुनर्योजना → पुनर्प्रतिपुष्टि
- योजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनर्योजना → पुनर्शिक्षण → पुनर्प्रतिपुष्टि
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उत्तर: (D) योजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनर्योजना → पुनर्शिक्षण → पुनर्प्रतिपुष्टि
सूक्ष्म शिक्षण चक्र: 1. नियोजन (Plan) 2. शिक्षण (Teach) 3. प्रतिपुष्टि (Feedback) 4. पुनर्नियोजन (Re-plan) 5. पुनर्शिक्षण (Re-teach) 6. पुनः प्रतिपुष्टि (Re-feedback)।
यह चक्र तब तक चलता है जब तक वांछित सुधार न हो जाए।सूक्ष्म शिक्षण में एक बार में छात्रों (प्रशिक्षुओं) की सामान्य संख्या कितनी होती है?
- केवल 1
- 50 से 60
- 5 से 10
- 30 से 40
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उत्तर: (C) 5 से 10
सूक्ष्म शिक्षण की विशेषताएँ — छोटी कक्षा (5-10 छात्र), कम समय, सीमित पाठ्यवस्तु और केवल एक शिक्षण कौशल। इससे प्रशिक्षु अपनी कमियाँ जल्दी पहचान कर सुधार सकता है।
सूक्ष्म शिक्षण का कौन सा सिद्धांत यह बताता है कि प्रक्रिया तब तक चलती रहे जब तक कौशल में परिपक्वता न आ जाए?
- रुचि का सिद्धांत
- प्रबलन का सिद्धांत
- निरन्तरता का सिद्धांत
- अभ्यास का सिद्धांत
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उत्तर: (C) निरन्तरता का सिद्धांत
सूक्ष्म शिक्षण के मुख्य सिद्धांत:
अभ्यास का सिद्धांत — छोटी इकाइयों में अभ्यास;
निरन्तरता का सिद्धांत — परिपक्वता आने तक चक्र दोहराना;
प्रबलन व मूल्यांकन का सिद्धांत — प्रतिपुष्टि से सुधार।"शिक्षण कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जिसे शिक्षक अपने कक्षा शिक्षण में प्रयोग कर सकता है" — यह परिभाषा किसकी है?
- बर्टन
- बी. के. पासी
- एलन
- एन. एल. गेज
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उत्तर: (D) एन. एल. गेज
एन. एल. गेज के अनुसार शिक्षण कौशल कक्षा की विविध क्रियाओं से सम्बन्धित होते हैं जिन्हें शिक्षक कक्षा अंतःक्रिया में लगातार प्रयोग करता है। प्रो. बी. के. पासी ने भी शिक्षण कौशल को 'सम्बद्ध शिक्षण व्यवहारों का समूह' कहा।
अच्छे प्रश्न कौशल में प्रश्न कैसे होने चाहिए?
- केवल हाँ/ना वाले
- लम्बे और उलझे हुए
- पाठ से असम्बद्ध
- प्रासंगिक, स्तरानुकूल और बोधगम्य
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उत्तर: (D) प्रासंगिक, स्तरानुकूल और बोधगम्य
प्रश्न कौशल के घटक — प्रश्नों की बनावट, प्रश्न पूछने की प्रक्रिया और प्रश्नों की पुनरावृत्ति न करना। प्रश्न प्रासंगिक (Relevant), स्तरानुकूल और बोधगम्य (समझने योग्य) होने चाहिए।
'पुनर्बलन कौशल' (Reinforcement Skill) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- कक्षा को शांत रखना
- पाठ को छोटा करना
- सही अनुक्रिया की प्रशंसा कर छात्रों की सहभागिता बढ़ाना
- छात्रों को दण्ड देना
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उत्तर: (C) सही अनुक्रिया की प्रशंसा कर छात्रों की सहभागिता बढ़ाना
सकारात्मक पुनर्बलन (शाबाश, बहुत अच्छा, मुस्कान, सिर हिलाना) से छात्र उत्साहित होकर कक्षा में अधिक भाग लेते हैं; नकारात्मक/अपमानजनक टिप्पणियों से बचना चाहिए।
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